Best Nazar Shayari 2025: Heart Touching Lines of the Year

Nazar Shayari has long been a cherished form of expression in poetry, capturing the depths of love, longing, and human emotion. In 2025, this art form continues to evolve, offering heart-touching lines that resonate with readers on multiple levels. 

Let’s explore the most impactful Shayari of the year and how these poignant verses reflect contemporary sentiments. 

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New & Trending Nazar Shayari Collection 2025

This collection showcases an array of verses that resonate deeply with contemporary audiences, weaving traditional themes into modern contexts. Each shayari serves as a powerful reminder of the beauty and complexity of human connections, offering solace to those navigating the challenges of relationships.

Katil Nigahen Shayari 2 Line

 

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी

कुछ मुझे भी ख़राब होना था

 

करने गए थे उस से तग़ाफ़ुल का हम गिला

की एक ही निगाह कि बस ख़ाक हो गए

 

निगाहें इस क़दर क़ातिल कि उफ़ उफ़

अदाएँ इस क़दर प्यारी कि तौबा

 

ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से

फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

 

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का

बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का

 

सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें

क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता

 

साक़ी मुझे शराब की तोहमत नहीं पसंद

मुझ को तिरी निगाह का इल्ज़ाम चाहिए

 

ये किन नज़रों से तू ने आज देखा

कि तेरा देखना देखा न जाए

Katil Nigahen Shayari
Katil Nigahen Shayari

 

Nigahen Shayari

 

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं

वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं

 

आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो

नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है

 

तुझे दानिस्ता महफ़िल में जो देखा हो तो मुजरिम हूँ

नज़र आख़िर नज़र है बे-इरादा उठ गई होगी

 

पहली नज़र भी आप की उफ़ किस बला की थी

हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए

 

मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ

नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा

 

मैं उम्र भर जवाब नहीं दे सका ‘अदम’

वो इक नज़र में इतने सवालात कर गए

 

धोका था निगाहों का मगर ख़ूब था धोका

मुझ को तिरी नज़रों में मोहब्बत नज़र आई

 

दीदार की तलब के तरीक़ों से बे-ख़बर

दीदार की तलब है तो पहले निगाह माँग

 

लोग नज़रों को भी पढ़ लेते हैं

अपनी आँखों को झुकाए रखना

 

उन रस भरी आँखों में हया खेल रही है

दो ज़हर के प्यालों में क़ज़ा खेल रही है

 

आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे

क्यूँ खिड़कियों से झाँक रही है क़ज़ा मुझे

 

साक़ी ज़रा निगाह मिला कर तो देखना

कम्बख़्त होश में तो नहीं आ गया हूँ मैं

 

अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो

क्या चाहती है उन की नज़र पूछते चलो

 

जिस तरफ़ उठ गई हैं आहें हैं

चश्म-ए-बद-दूर क्या निगाहें हैं

 

देखी हैं बड़े ग़ौर से मैं ने वो निगाहें

आँखों में मुरव्वत का कहीं नाम नहीं है

 

देखा है किस निगाह से तू ने सितम-ज़रीफ़

महसूस हो रहा है मैं ग़र्क़-ए-शराब हूँ

 

निगाह-ए-नाज़ की पहली सी बरहमी भी गई

मैं दोस्ती को ही रोता था दुश्मनी भी गई

 

अधर उधर मिरी आँखें तुझे पुकारती हैं

मिरी निगाह नहीं है ज़बान है गोया

 

निगाह-ए-नाज़ की मासूमियत अरे तौबा

जो हम फ़रेब न खाते तो और क्या करते

 

बरसों रहे हैं आप हमारी निगाह में

ये क्या कहा कि हम तुम्हें पहचानते नहीं

 

दीद के क़ाबिल हसीं तो हैं बहुत

हर नज़र दीदार के क़ाबिल नहीं

 

बे-ख़ुद भी हैं होशियार भी हैं देखने वाले

इन मस्त निगाहों की अदा और ही कुछ है

 

हाल कह देते हैं नाज़ुक से इशारे अक्सर

कितनी ख़ामोश निगाहों की ज़बाँ होती है

 

अबरू ने मिज़ा ने निगह-ए-यार ने यारो

बे-रुत्बा किया तेग़ को ख़ंजर को सिनाँ को

 

क़यामत है तिरी उठती जवानी

ग़ज़ब ढाने लगीं नीची निगाहें

 

शग़ुफ़्तगी-ए-दिल-ए-कारवाँ को क्या समझे

वो इक निगाह जो उलझी हुई बहार में है

 

वो नज़र कामयाब हो के रही

दिल की बस्ती ख़राब हो के रही

 

बात तेरी सुनी नहीं मैं ने

ध्यान मेरा तिरी नज़र पर था

Nigahen Shayari
Nigahen Shayari

 

अदा अदा तिरी मौज-ए-शराब हो के रही

निगाह-ए-मस्त से दुनिया ख़राब हो के रही

 

खड़ा हूँ देर से मैं अर्ज़-ए-मुद्दआ के लिए

इधर भी एक नज़र कीजिए ख़ुदा के लिए

 

नज़र भर के जो देख सकते हैं तुझ को

मैं उन की नज़र देखना चाहता हूँ

 

कोई किस तरह राज़-ए-उल्फ़त छुपाए

निगाहें मिलीं और क़दम डगमगाए

 

है तेरे लिए सारा जहाँ हुस्न से ख़ाली

ख़ुद हुस्न अगर तेरी निगाहों में नहीं है

 

वो काफ़िर-निगाहें ख़ुदा की पनाह

जिधर फिर गईं फ़ैसला हो गया

 

साक़ी मिरे भी दिल की तरफ़ टुक निगाह कर

लब-तिश्ना तेरी बज़्म में ये जाम रह गया

 

लिया जो उस की निगाहों ने जाएज़ा मेरा

तो टूट टूट गया ख़ुद से राब्ता मेरा

 

कब उन आँखों का सामना न हुआ

तीर जिन का कभी ख़ता न हुआ

 

सीधी निगाह में तिरी हैं तीर के ख़्वास

तिरछी ज़रा हुई तो हैं शमशीर के ख़्वास

 

मुझे तावीज़ लिख दो ख़ून-ए-आहू से कि ऐ स्यानो

तग़ाफ़ुल टोटका है और जादू है नज़र उस की

 

हाए वो राज़-ए-ग़म कि जो अब तक

तेरे दिल में मिरी निगाह में है

 

साक़ी ने निगाहों से पिला दी है ग़ज़ब की

रिंदान-ए-अज़ल देखिए कब होश में आएँ

 

ये तिरी मस्त-निगाही ये फ़रोग़-ए-मय-ओ-जाम

आज साक़ी तिरे रिंदों से अदब मुश्किल है

 

तड़प रहा है दिल इक नावक-ए-जफ़ा के लिए

उसी निगाह से फिर देखिए ख़ुदा के लिए

 

उन मस्त निगाहों ने ख़ुद अपना भरम खोला

इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए

 

शिकस्त-ए-तौबा की तम्हीद है तिरी तौबा

ज़बाँ पे तौबा ‘मुबारक’ निगाह साग़र पर

 

उस ने मिरी निगाह के सारे सुख़न समझ लिए

फिर भी मिरी निगाह में एक सवाल है नया

 

महसूस कर रहा हूँ ख़ारों में क़ैद ख़ुशबू

आँखों को तेरी जानिब इक बार कर लिया है

 

छल-बल उस की निगाह का मत पूछ

सेहर है टोटका है टोना है

 

पड़ गई क्या निगह-ए-मस्त तिरे साक़ी की

लड़खड़ाते हुए मय-ख़्वार चले आते हैं

 

न मिज़ाज-ए-नाज़-ए-जल्वा कभी पा सकीं निगाहें

कि उलझ के रह गई हैं तिरी ज़ुल्फ़-ए-ख़म-ब-ख़म में

 

देखा हुज़ूर को जो मुकद्दर तो मर गए

हम मिट गए जो आप ने मैली निगाह की

 

Nazar Shayari 2 Line In English

 

Faqat Nigāh Se Hotā Hai Faisla Dil Kā

Na Ho Nigāh Meñ Shoḳhī To Dilbarī Kyā Hai

 

Kuchh Tumhārī Nigāh Kāfir Thī

Kuchh Mujhe Bhī Ḳharāb Honā Thā

 

Karne Ga.E The Us Se Taġhāful Kā Ham Gila

Kī Ek Hī Nigāh Ki Bas Ḳhaak Ho Ga.E

 

Us Ne Mirī Nigāh Ke Saare Suḳhan Samajh Liye

Phir Bhī Mirī Nigāh Meñ Ek Savāl Hai Nayā

 

Un Mast Nigāhoñ Ne Ḳhud Apnā Bharam Kholā

Inkār Ke Parde Meñ Iqrār Nazar Aa.E

                                                     

Ye Tirī Mast-Nigāhī Ye Faroġh-E-Mai-O-Jām

Aaj Saaqī Tire Rindoñ Se Adab Mushkil Hai

 

Taḍap Rahā Hai Dil Ik Nāvak-E-Jafā Ke Liye

Usī Nigāh Se Phir Dekhiye Ḳhudā Ke Liye

 

Haa.E Vo Rāz-E-Ġham Ki Jo Ab Tak

Tere Dil Meñ Mirī Nigāh Meñ Hai

Nazar Shayari In English
Nazar Shayari In English

 

Saaqī Ne Nigāhoñ Se Pilā Dī Hai Ġhazab Kī

Rindān-E-Azal Dekhiye Kab Hosh Meñ Aa.Eñ

 

Sīdhī Nigāh Meñ Tirī Haiñ Tiir Ke Ḳhvās

Tirchhī Zarā Huī To Haiñ Shamshīr Ke Ḳhvās

 

Kab Un Āñkhoñ Kā Sāmnā Na Huā

Tiir Jin Kā Kabhī Ḳhatā Na Huā

 

Saaqī Mire Bhī Dil Kī Taraf Tuk Nigāh Kar

Lab-Tishna Terī Bazm Meñ Ye Jaam Rah Gayā

 

कातिल नजर शायरी

 

Mein Kkhuda Ki Nazron Mein Bhi Gunahgaar Hota Hon Frazz

Jab Sajdon Mein Bhi Woh Shakhs Mujhe Yaad Aa Taa Hai

 

Humein Shayar Samajh Ke Yoon Najar Andaz Mat Kariye

Najar Hum Fer Le Toh Husn Ka Bazar Gir Jayega

 

Aap ik zahmat-e-nazar to karen

Kaun behosh ho nahin sakta

 

Nazar Un Ki Zabaan Un Ki Taajjub Hai Ke Is Par Bhi

Nazar Kuch Aur Kehti Hai Zabaan Kuch Aur Kehti Hai

 

Logon ka ehsan hai mujh par aur tira main shukr-guzar

Tir-e-nazar se tum ne maara laash Uthai logon ne

कातिल नजर शायरी
कातिल नजर शायरी

 

Dheeray Se Sarakti Hai Raat Us Ke Aanchal Ki Tarah

Uska Chehra Nazar Aata Hai Jheel Main Kanwal Ki Tarah

 

Teri Khushbu Ne Meri Aankh Ko Benaye Di

Tairay Honay Ne Bataya Kh Nazar Aata Hai

 

Bahut Dino Mai Taghaful Ne Tere Paide Ki

Wo Ik Nigha Ki Ba-Zahir Nigha Se Kam Hai

Conclusion

Nazar Shayari offers a unique blend of poetic expression and emotional depth, allowing individuals to articulate their feelings about the complexities of attraction and envy. These verses not only highlight the beauty of love but also acknowledge the darker side of human emotions, such as jealousy and longing.

By delving into the world of Shayari, readers can gain insight into their own experiences and the power of words to convey profound sentiments. 

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