Matlabi Rishte Dhoka Shayari – Reality of Today’s Relationships

Matlabi Rishte Dhoka Shayari 2025 encapsulates the complex emotions tied to betrayal and deceit in relationships. In a world where genuine connections seem increasingly rare, these heartfelt lines offer solace and understanding for those grappling with fake bonds. 

Let’s explore the poignant Shayari that resonates with the pain of being misled by those we trust. By exploring these verses, readers will find comfort and perhaps a way to articulate their feelings of disillusionment.

 

Matlabi Rishte Dhoka Shayari – Reality of Today’s Relationships

In today’s fast-paced world, relationships often seem to be more transactional than emotional. The concept of चालाक झूठे मतलबी रिश्ते शायरी captures this unsettling reality, where genuine connections are overshadowed by self-interest. 

Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

Many individuals enter relationships not for love or companionship but for personal gain, leaving behind a trail of heartache and betrayal. This shift in dynamics can be reflected in poignant shayari, which eloquently articulates the pain and disillusionment felt by those caught in this web of deceit.

स्वार्थी लोग मतलबी रिश्ते शायरी 

Selfish people often weave intricate webs of deceit, creating fake relationships that serve only their interests. These connections, devoid of genuine emotion, leave a bitter aftertaste in the heart. 

भगवान जब तूने रिश्ते बनाना सीखा दिया,

तो अपने मतलब के लिए इन्हे तोडना क्यों सीखा दिया।

 

जिनकी दोस्ती की मिसाल दिया करते थे,

ये हमारे पीठ पीछे हमारी ही कब्र खोद रहे हैं।

 

जिनकी दुआ किया करते थे रोज हजारों में,

वहीं बेचते थे रिश्ते हर रोज शहर और बाजारों में।

 

कभी मतलब के लिए तो कभी मनोरंजन के लिए,

हर कोई प्यार ढूंढ रहा है यहाँ ज़िन्दगी के लिये।

 

सड़कों की तरह काश ज़िन्दगी के रास्तों पर भी

लिखा होता की आगे खतरनाक मोड़ है, सावधान रहें।

 

दुनिया की इस भीड़ में एक तनहा सी रूह हूँ,

चेहरे तो कई है जनाब, तभी तो हँसता बहुत खूब हूँ।

 

पक्के और गहरे रिश्ते तो बचपन में बनते थे,

अब बड़े हुए तो पता लगा सब अपने मतलब से बात करते हैं।

 

देख लेना किसी दिन एहसास होगा तुम्हे,

कोई अपना जो बिना मतलब चाहता था तुम्हे।

 

जब कोई इंसान नज़र अंदाज़ करना शुरू करदे,

तो समझ लेना उसकी ज़रूरतें आपसे पूरी होगी है।

 

ऐसे दोस्तों से दोस्ती रखिये जो आपकी परवाह करते हैं,

इस्तेमाल करने वाले तो आपको ढूँढ ही लेंगे।

 

यादें उनकी जब भी आती है,

उनके जितना मतलबी और कोई नही,

हर बार बता कर जाती है।

 

ये जो हालत है मेरे, एक ना एक दिन सुधर ही जायेंगे,

लेकिन तब तक काफी लोग, इस दिल से उतर जायेंगे।

 

टूट गया दिल तो शोर क्या करें,

खुद ही किया था प्यार,

अब तुमसे सवाल क्या करें।

 

सोचो मत दुनिया का भला,

यहां सब अपनी अपनी करते है,

फर्क नही पड़ता आप खुश है या नही,

बस अपनी खुशी से ही मतलब रखते है।

 

कटेगी अब ज़िंदगी सुकून से,
कुछ अपनो की मेहरबानी से,
उनके रहते अब हम भी मतलबी हो गए।

जरूर एक दिन वो शख्स तड़पेगा हमारे लिए अभी
तो खुशियाँ बहोत मिल रही है उसे मतलबी लोगो से।

रिश्तों को खुदगर्जियो से तोला हे कुछ लोगो ने,
अब कोई हाल भी पूछे तो मतलब ही नज़र आता है।

रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है,
खाली हो जेब तो अपने हर रिश्तें तोड़ देते है।

 

मेरी जेब में ज़रा सा छेद क्या हो गया,
सिक्के से ज़्यादा तो रिश्ते गिर गए।

 

फायदा बहुत गिरी हुई चीज है,
लोग उठाते ही रहते हैं।

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झूठे मतलबी रिश्ते शायरी

Fake & Selfish Relationships Shayari unravels the complexities of connections that lack authenticity. These relationships often masquerade as deep bonds but are rooted in self-interest and superficiality. 

Matlabi Rishte Shayari

हारा हुआ सा लगता है वजूद मेरा,
हर एक ने लूटा है दिल का वास्ता देकर।

ये संग दिलो की दुनिया है, यहाँ संभल के चलना दोस्त,
यहाँ पलकों पर बिठाया जाता है, नजरो से गिराने के लिए!

घमंड था बहुत मेरे रिश्तेदार मेरे है,
लेकिन अच्छा हुआ की,
आप लोगो ने मेरा घमंड तोड़ दिया।

जिन्हे ज्ञान हे उन्हें घमंड केसा,
जिनको घमंड हे, उन्हें ज्ञान केसा।

किस बात पर रिश्तेदार इतने घमंडी हे,
बनकर मिट जाने की हम सब की एक छोटी सी कहानी हे।

जिस पर यकीन होता है जब वह धोखा देता है,
तो पूरी दुनिया मतलबी सी लगने लग जाती है।

अपने मतलब की बारी आई तो सब रिश्ते अच्छे लगने लगे,
और जब अपनों की बारी आई तो सब बुरे लगने लगें।

बहुत अजीब सी है शहरों की रौशनी,
उजालों के बावजूद अच्छे चेहरे पहचानना मुश्किल है।

आजकल के ज़माने में, अपने दिखते नहीं,
और जो दिखते हैं वह अपने नहीं।

यूँ असर डाला है मलतबी स्वार्थी लोगो ने दुनिया पर,
हाल चाल भी पूछो तो लोग समझते है की कुछ काम होगा।

Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

In the realm of human connections, Shayari on selfish relationships that betray in difficult times captures the essence of fleeting trust and the fragility of bonds. Such verses often reflect the bittersweet realization that not everyone who walks alongside us in moments of joy is willing to share the weight of our burdens. 

These poignant lines serve as a mirror, revealing how some individuals thrive in the light of our successes but vanish like shadows when storms loom overhead. 

तुम्हारे झूठे वादों का अब,

हमें ऐतबार नहीं, धोखे ने सिखाया हमें,

कोई इस दुनिया में किसी का खास नहीं!

 

धोखा देती है मासूम चेहरों की चमक,

हर कांच के टुकड़े को आप हीरा नहीं समझें!

 

तुमसे धोखा बहुत मिल गया है,

अब मुझे अपने मौके की तलाश है!

 

धोका तूने ऐसा दिया मेरी जिंदगी में,

जब साथ देने की बरी तभी साथ छोड़ दिया तूने!

 

दोगले लोगों पर शायरी 

दुश्मन से तो सावधान रहना सीख लिया,

मगर दोस्त के रूप में छिपे दोगले का क्या करें।

 

दोगला इंसान वही होता है,

जो अपनी असलियत छुपाने में माहिर होता है।

 

दुश्मन से भी खतरनाक हैं, ये दोगले यार,

सामने हँसते हैं, पीछे करते हैं वार।

 

मीठी-मीठी बातें करते हैं, पीठ पीछे वार करते हैं,

दोगले लोग ज़हर घोलते हैं, हर रिश्ता मारते हैं।

 

Conclusion

The exploration of “Matlabi Rishte Dhoka Shayari 2025” reveals the deep emotional scars left by betrayal and insincere relationships. These heartfelt lines serve as a reminder of the importance of genuine connections in our lives, emphasizing that not all bonds are built on trust and love.

As we navigate through the complexities of human relationships, it becomes essential to recognize the signs of fake ties and protect our hearts from potential pain. The poignant verses in this collection resonate with those who have experienced the sting of deceit, offering solace and understanding. 

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